मैं लिखता हूँ…
इसलिए नहीं कि कोई पढ़े,
न ही इसलिए कि कोई मेरे अल्फ़ाज़ समझे।

बस कुछ दर्द ऐसे होते हैं,
जो आँखों से बह नहीं पाते,
और कुछ ख़ामोशियाँ ऐसी…
जिन्हें होंठों तक लाना मुमकिन नहीं होता।

इसलिए अपने भीतर उमड़ते
जज़्बातों के समंदर को
काग़ज़ के किनारे लगाने बैठ जाता हूँ।

हर लफ़्ज़ के पीछे एक दर्द होता है,
हर स्याही की बूँद में कोई ख़ामोशी…
और हर अधूरी कहानी में
कुछ ऐसा छुपा होता है,
जिसे शायद मैं ख़ुद भी
कभी लफ़्ज़ों में कह नहीं सका।

लोग इसे शायरी समझते हैं…
मैं तो बस अपने बिखरे हुए वजूद को
काग़ज़ पर समेटता हूँ।
किसी ने पढ़ लिया तो अच्छा…
न पढ़ा तो भी कोई शिकायत नहीं।

क्योंकि ये अल्फ़ाज़
दुनिया के लिए नहीं,
मेरे अंदर दफ़्न उस शोर के लिए हैं,
जो ख़ामोश होकर भी
हर रोज़ मुझे सुनाई देता है।

Share This Post

प्रतिक्रिया व्यक्त करा

एक विचार, एक संवाद हे केवळ साहित्यलेखनाचे व्यासपीठ नसून, विचारांच्या देवाणघेवाणीतून आत्मचिंतन आणि परिवर्तनाची दिशा शोधण्याचा हा माझा एक प्रामाणिक प्रयत्न आहे.

साहित्याच्या माध्यमातून जीवन, समाज, संस्कार आणि मानवी मूल्यांचा शोध घेत वाचक-रसिकाला स्वतंत्रपणे विचार करण्यास प्रवृत्त करणे, हा या व्यासपीठाचा प्रमुख उद्देश आहे.

कारण, विचार व्यक्तीपासून सुरू होतो, संवादातून समृद्ध होतो आणि कृतीतून परिवर्तन घडवू शकतो, हा माझा विश्वास आहे.

Is this your new site? Log in to activate admin features and dismiss this message
लॉगीन